मक़दूर नहीं उस तज्जली के बयाँ का

मक़दूर१ नहीं उस तज्जली२ के बयाँ का
जूँ-शमा३ सरापा हो अगर सर्फ़४ ज़बाँ का

पर्दे को तअय्युन५ के दरे-दिल से उठा दे
खुलता है अभी पल में तिलिस्मात जहाँ का

टुक६ देख सनमख़ानए-इश्क़७ आन के ऐ शैख़!
जूँ शमए-हरम८ रंग झलकता है बुताँ का

इस गुलशने-हस्ती९ में अजब दीद१० है लेकिन
जब चश्म११ खुले गुल की तो मौसम हो ख़िजाँ का

दिखलाइए ले जाके तुझे मिस्र के बाज़ार
लेकिन नहीं ख़्वाहाँ१२ कोई वाँ१३ जिंसे-गिराँ१४ का

क़ता
‘सौदा’ जो कभी गोश से हिम्मत के सुने तू
मज़मून१६ यही है जरसे-दिल१७ की फ़ुग़ाँ१८ का

हस्ती१९ से अदम२० तक नफ़से-चंद की है राह
दुनिया से गुज़रना सफ़र ऐसा है कहाँ का!

१.सामर्थ्य २.आलोक ३.शमा की तरह ४.व्यय ५.अस्तित्व-लोक ६.ज़रा
७.प्रेम का मंदिर ८.हरम की शमा की तरह ९.जीवन रूपी उपवन १०.दृश्य
११.आँख १२.इच्छुक १३.वहाँ १४.क़ीमती माल १५.कान १६.विषय १७.दिल
रूपी घंटी १८.आह-पुकार १९.अस्तित्व २०.अनस्तित्व, मृत्युलोक २१.चंद
साँसों की

टूटे तिरी निगह से अगर दिल हुबाब का

टूटे तिरी निगह से अगर दिल हुबाब१ का
पानी भी फिर पियें तो मज़ा है शराब का

कहता है आईना कि समझ तरबियत२ की क़द्र
जिनने किया है संग३ को हमरंग आब का

दोज़ख़ मुझे क़ुबूल है ऐ मुन्किरो-नकीर४
लेकिन नहीं दिमाग़ सवालो-जवाब का५

था किसके दिल को कश्मकशे-इश्क़ का दिमाग़
यारब बुरा हो दीद-ए-ख़ानाख़राब६ का

ज़ाहिद सभी है नेमते-हक़७ जो है अक्लो-शर्ब८
लेकिन अजब मज़ा है शराबो-कबाब का

ग़ाफ़िल ग़ज़ब से होके करम पर न रख नज़र
पुर है शरारे-बर्क़ से९ दामन सहाब१० का

क़तरा गिरा था जो कि मेरे अश्के-गर्म से
दरिया में है हनोज़११ फफोला हुबाब का

ऐ बर्क़ किस तरह से मैं हैराँ हूँ तुझ कने१३
नक़्शा है ठीक दिल के मिरे इज़्तराब१४ का

‘सौदा’ निगाह दीद-ए-तहक़ीक़१५ के हुज़ूर१६
जल्वा हरेक ज़र्रे में है आफ़ताब१७ का

१.बुलबुला २.पालन-पोषण ३.पत्थर ४.दो फ़रिश्ते जो इन्सान के
अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं ५.सवाल-जवाब सहने की
हिम्मत नहीं है ६.बरबाद घर वाले की नज़र ७.ईश्वर की दी हुई नेमत
८.खाने-पीने की वस्तुएँ ९.बिजली की चिंगारी से १०.बादल ११.अभी तक
१३.तेरी ख़ातिर १४.बेचैनी १५.खोजी दृष्टि (वाला) १६.सामने १७. सूरज

पाया वो हम इस बाग़ में जो काम न आया

पाया वो हम इस बाग़ में जो काम न आया
कुछ अपने लिए जुज़-समरे-ख़ाम१ न आया

ऐ ज़मज़मापरदाज़े-चमन२, नाला हमारा
वो मुर्ग़३ न समझे जो तहे-दाम४ न आया

आरास्ता जो बज़्म हुई५ दौरे-फ़लक़ में६
वाँ७ जाम बजुज़-गर्दिशे-अय्याम८ न आया

बुस्तान९ तो पुर-अज़-मेवए-अक़साम१० है लेकिन
साये में किसू११ नख़्ल१२ के आराम न आया

मैं नंग१३ हूँ इतना कि पिदर१४ और पिसर१५ के
लब पर कभू मजलिस में मिरा नाम न आया

है रंगे-तमाशा-ए-जहाँ१६ सूरते-ख़ुर्शीद१७
जो सुब्ह को देखा वो नज़र शाम न आया

आफ़ात ही ऐ चर्ख़, उठा जानी हैं तूने!१८
ज़ालिम, किसी गिरते को तुझे थाम न आया

इसका तो गिला क्या है कि बुस्ताने-जहाँ में१९
मुझ तक क़दहे-बाद-ए-गुल्फ़ाम२० न आया

१.कच्चे फल के अतिरिक्त २.चमन के गीत गाने वाला ३.पक्षी ४.जाल के नीचे
५.महफ़िल जब सज गयी ६.आकाश के चक्र में ७.वहाँ ८.समय चक्र के अतिरिक्त
९.बाग़ १०.तरह-तरह के मेवों से भरा ११.किसी(पुरानी उर्दू) १२.पेड़ १३.लज्जा
१४.पिता १५.पुत्र १६.दुनिया के तमाशे का रंग १७.सूरज की तरह १८.ऐ आकाश,
तूने सिर्फ़ आफ़तें ढाना जाना है १९.दुनिया रूपी बाग़ में २०.उम्दा शराब का घड़ा

याँ न ज़र्रा ही झमकता है फ़क़त गर्द के साथ

याँ न ज़र्रा ही झमकता है फ़क़त१ गर्द के साथ
जल्वागर नूर है ख़ुरशीद२ का हर फ़र्द३ के साथ

ज़ख़्म की तरह ज़माने में तू काट अपनी उम्र
ख़ंदा४ या गिरिया५ जो कुछ होवे सो टुक६ दर्द के साथ

क़द्र नहीं दौलते-बे-सई की७ तुझको वरना
ज़र८ को निस्बत९ नहीं आशिक़ की रुख़े-ज़र्द१० के साथ

तेग़े-चोबी से कहाँ क़ब्ज़े-फ़ौलाद हो नस्ब११
न रहे साहिबे-जौहर१२ कभू नामर्द के साथ

हम कहाते हैं तिरे बंदए-बेज़र१३ प्यारे
गुल ने बुलबुल को ख़रीदा है ज़रे-वर्द के साथ१४

किस तरह ख़ानए-गरदूँ के बिना१५ हो दिलचस्प
मानी१६ इस बैत१७ के इक हम हैं सो आवर्द के साथ१८

क़ता

सुब्ह-दम आज चमन में ब-लब जो ‘सौदा’
शे’र बैठा वो ये पढ़ता था निपट दर्द के साथ

दिल को चाहा मैं ख़ाली करूँ मानिंदे-हुबाब१९
हो गई जान हवा यक-नफ़से-सर्द के साथ२०

१.केवल २.सूरज ३.व्यक्ति ४.हँसी ५.रुदन ६.ज़रा ७.बिना प्रयास मिली दौलत की
८.सोना(धन-दौलत) ९.सम्बन्ध १०.पीला पड़ा चेहरा ११.लकड़ी की तलवार से फ़ौलाद
का क़ब्ज़ा कब गाड़ा जा सकता है १२.गुणवान व्यक्ति १३.बेमोल बंदा १४.बुलबुल के
गीत के साथ १५.आकाश रूपी घर की बुनियाद १६.अर्थ १७.शे’र १८.सप्रयास(उर्दू काव्यशास्त्र
में उस शे’र को आमद कहते हैं जो अपने आप मुँह से फूट पड़े जबकि सप्रयास कहे गये
शे’र को आवर्द या आवरद कहते हैं) १९.बुलबुले की तरह २०.ठण्डी साँस के साथ

अक़्ल उस नादाँ में क्या जो तेरा दीवाना नहीं

अक़्ल उस नादाँ में क्या जो तेरा दीवाना नहीं
नूर१ पर तेरे मगस२ है वो जो परवाना नहीं

अपनी तौबा ज़ाहिदा जुज़ हर्फ़े-रिन्दाना नहीं३
ख़ुम४ हो यहाँ तो एहतियाजे-जामो-पैमाना५ नहीं

ख़ाले-ज़ेरे-ज़ुल्फ६ पर जी मत जला ऐ मुर्ग़े-दिल७
मान मेरा भी कहा ये दाम८ बे-दाना नहीं

अपने काबे की बुज़ुर्गी९ शैख़ जो चाहे सो कर
अज-रु-ए-तारीख़१० तो बेश-अज-सनमख़ाना११ नहीं

गर है गोशे-फ़ह्मे-आलम१२ वरना यूँ कहता है चुग़्द१३
थी न आबादी जहाँ ऐसा तो वीराना नहीं

बे-तजल्ली१४ तूर की किससे ये दिल गर्मी करे
जल बुझे हर शमा पर अपनी वो परवाना नहीं

हाय किस साक़ी ने पटका इस तरह मीना-ए-दिल१५
हो जहाँ रेज़ा१६ न उसका कोई मैख़ाना नहीं

सुनके नासिह का सुख़न१७ मजनूँ ने ‘सौदा’ यूँ कहा
ऐसे अहमक़ से मुख़ातिब हूँ मैं दीवाना नहीं

१.प्रकाश २.मक्खी ३.शराबी शब्द के सिवा कुछ और नहीं
४.शराब का घड़ा ५.जान और पैमाने की आवश्यकता
६.ज़ुल्फ़ के नीचे की त्वचा ७.दिल रूपी पक्षी ८.जाल
९.बड़ाई १०.इतिहास के आधार पर ११.बुतख़ाने से अधिक
(तात्पर्य यह है कि मुह्म्मद से पहले तक काबा भी एक
बुतख़ाना ही था) १२.दुनिया की समझ की बात सुनने वाला
कान १३.उल्लू १४.आलोक के बिना १५.दिल रूपी सुराही
१६.टुकड़ा १७.नसीहत करने वाले का वचन