पहली नज़र का पहला प्यार

पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना
आँखों में बेताबी है, चैन कहाँ है
डरता हूँ कहीं कोई बन जाये ना अफ़साना

फूल हँसें हैं सारे, दिल धड़का है
ठण्डी साँसों में जैसे शोला भड़का है
उसका चेहरा चाँद है, नूर है
लड़की नहीं वह इक हूर है
थाम के दिल मैं राहों में खड़ा हूँ कि
हो जाऊँ उसके तीरे-नज़र का निशाना

पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
अब मैं दिल में उसके बनाऊँगा आशियाना
वह मेरी अब इक मंज़िल है
उसकी बाँहो के सिवा कहाँ कोई मेरा ठिकाना

उसको देखकर जी नहीं भरता है
कैसे जताये उसे उस पर मरता है
भोली-भाली वह सबसे जुदा है
सबसे निराली उसकी अदा है
आये वह कभी जो मेरी दुनिया में तो
छोड़ दूँ उसके लिए मैं यह सारा ज़माना

पहली नज़र का पहला प्यार कर गया दीवाना
मेरा दिल यह बेचारा हो गया आशिक़ाना


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: ०८ मई २००३

तुमको लौट के यहीं आना है

तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)
तुम मानो या न मानो
मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है)
तुम मानो या न मानो

एक इल्ज़ाम देकर जा रहे हो ग़ैर की बाँहों में
कभी तो तुम्हें उसको ठुकराना है
तुम मानो या न मानो

हम दोस्त थे तुमने अदू मान लिया जाने दो
मुझे आज रब को भी आज़माना है
तुम मानो या न मानो

देखता हूँ यह रंग यह तेवर कब तलक हैं
तुमको ख़ुद चलके मेरे पास आना है
तुम मानो या न मानो

जो गिरह तुमने ख़ुद डाली हमारे रिश्ते में
उसको तुम्हें दुनिया से छुपाना है
तुम मानो या न मानो


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १४ अप्रैल २००३

बचपन की ख़ुशबू

मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है
कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है

कभी पतंगों के साथ आसमाँ में उड़ती है
कभी मालती की बेलों में महकती खिलती है

रुचि सोनल जूली नीता बिन्नू संजू पवन प्रीति सोना
जैसे नामों की बिखरी तस्वीर जोड़ते मिलती है

कभी स्कूल में अभय राजीव हर्पित को पूछती है
कभी सआदत गंज की गलियों में टहलती है

फाख़्ता और गौरैया के आशियानों से गुज़रते हुए
मेरे बाएँ पाँव का भँवर सहलाती टटोलती है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२