यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया

यह सावन मेरा मन पढ़-पढ़ रोया अबकि बार
यह गरज मुझे डराती रही तेरे तेवर की तरह

बदलना था तुम्हें तो मुझको तुमने बदला क्यों
हमने ग़म को पहना है दिल पे ज़ेवर की तरह


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

तुमको लौट के यहीं आना है

तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है)
तुम मानो या न मानो
मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है)
तुम मानो या न मानो

एक इल्ज़ाम देकर जा रहे हो ग़ैर की बाँहों में
कभी तो तुम्हें उसको ठुकराना है
तुम मानो या न मानो

हम दोस्त थे तुमने अदू मान लिया जाने दो
मुझे आज रब को भी आज़माना है
तुम मानो या न मानो

देखता हूँ यह रंग यह तेवर कब तलक हैं
तुमको ख़ुद चलके मेरे पास आना है
तुम मानो या न मानो

जो गिरह तुमने ख़ुद डाली हमारे रिश्ते में
उसको तुम्हें दुनिया से छुपाना है
तुम मानो या न मानो


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १४ अप्रैल २००३