ॐ शक्ति है

ॐ शक्ति है ॐ ही ईश्वर प्रतीक है
ॐ नश्वर है ॐ ही सर्वत्र एक है
ॐ भक्ति है ॐ ही शान्ति मंत्र है
ॐ जगत है ॐ ही जीवन तंत्र है

ॐ में तुम हो ॐ हर कण तुम में
ॐ मृदा धातु जल वायु गगन में

ॐ सत्य है ॐ ही चिंतन मनन है
ॐ आत्मा है ॐ ही प्रभु शरण है
ॐ विष्णु है ॐ ही त्रिकाल महादेव है
ॐ दृष्टि है ॐ ही सुर और रव है

ॐ विद्यमान है प्राण है हर जीव में
ॐ ही सजीव में ॐ ही निर्जीव में

ॐ संगीत है ॐ ही श्रेष्ठ मित्र है
ॐ असत्य पर विजय का शस्त्र है
ॐ ब्रह्माण्ड है ॐ उत्पत्ति सूत्र है
ॐ मोक्ष है ॐ ही मुक्ति स्रोत है

ॐ चहुँ ओर ज्ञान का प्रकाश है
ॐ कष्टकाल अंधकार का विनाश है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८