हम में जीतने का हौसला है

हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’
यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे

यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

आँखों से सुना आँखों ने कहा

आँखों से सुना आँखों ने कहा
आँखों ने सुना आँखों से कहा

सिलसिला प्यार का चल पड़ा
पत्थर दिल पिघल पड़ा
क्या? कुछ चाहिए प्यार को
बस प्यार चाहिए प्यार को

सितमगर का नाज़ उठाना पड़ा
हौसला उसको दिखाना पड़ा
वक़्त कहाँ इन्तिज़ार को
इम्तिहाँ है मेरे प्यार को

वह शब ख़्यालों में रहा
आँखों ने सुना आँखों ने कहा

जल गया साँस का हर टुकड़ा
रह गया फाँस का टुकड़ा
प्यार को वह झलक चाहिए
रहने को फ़लक़ चाहिए

बाँहों में आये चाँद का टुकड़ा
देखता रहूँ उसका मुखड़ा
जिस्म में वह महक चाहिए
प्यार में वह दहक चाहिए

मेरा दिल आइने में रहा
आँखों से सुना आँखों ने कहा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

जब-जब चाँद को

जब-जब चाँद को
छूना चाहा है मैंने
बादलों के साये
उसको दूर ले गये
मैं अब कि ऐसा
मौसम बनाऊँगा
बादलों के क़तरे भी
न नज़र आयेंगे
मेरी चन्द्रमा तुझे
लकीरों में सजाऊँगा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २०००-२००१

ख़ाबों में रंग भरना शौक़ नहीं

ख़ाबों में रंग भरना शौक़ नहीं
सवालों का जवाब मौत नहीं

उम्र का जाम पिलाये जा साक़ी
यह जाम है कोई ख़ाब नहीं

यह किस रेगिस्ताँ में ला छोड़ा
मुझे उम्मीदे-सराब नहीं

जो तू न दे पाये ज़माने को
‘नज़र’ ऐसा कोई जवाब नहीं

सराब = बादल, cloud


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००२

वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है

वह तेरी पहली नज़र का निशाना याद है
हमको आज भी तुमसे दिल का लगाना याद है

दोस्तों में कहते थे किसी से प्यार हमें
वह पूछें अगर तो नाम तेरा छुपाना याद है

गरचे तुमने कभी हमको अपना न कहा
मगर तुमसे मिलने का झूठा बहाना याद है

सबब वह जिससे धड़कनें तेज़ हो जाएँ थीं
वह इसी दरवाज़े से तेरा आना-जाना याद है

कुछ कहकर फिर चुप हो जाना यकायक
निगाहें फेर के हमको तेरा उकसाना याद है

न कह पाये हम कभी कि प्यार है तुमसे
पर इज़हार के लिए हौसला जुटाना याद है

किस पल तुम छोड़कर गये मालूम न हुआ
हमको आज भी ज़िन्दगी का अफ़साना याद है

तेरे इन्तिज़ार में जो न कटा एक लम्हा
हमको उस लम्हें का क़िस्सा पुराना याद है

हमको उनका जादू खैंचता रहा बार-बार
तेरी आँखों का सितारों जैसा झिलमिलाना याद है

जब भी कोई पूछता था कैसी दिखती हो तुम
वह सभी से चाँद को तेरे जैसा बताना याद है

गरचे= although, सबब= reason


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३