सावन की बदली बरसने लगी है

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सावन की बदली बरसने लगी है
माटी ये सौंधी महकने लगी है
मेरा मन तेरे बारे में सोचता है
धड़कन सीने में गरजने लगी है

हर एक गली में पानी भरा हुआ है
काग़ज़ की नाव का चलना हुआ है
खिड़कियों पर बूँदें बिखरी हुईं हैं
बाग़ की कली-कली हँसने लगी है

मैंने तेरे नाम ख़त रोज़ लिखे थे
सँभाल कर तुझे देने को रखे थे
मैं आज उन्हें खोलकर पढ़ता हूँ
इन आँखों से तू छलकने लगी है

फिर कैसे भी तुझसे मेरी राह जुड़े
तू मुझे मिलकर चाहे रोज़ लड़े
पर ज़िंदगी की हर सुबह तुझसे है
ये फ़िज़ा ये हवा बहकने लगी है

विनय प्रजापति ‘नज़र’
रचनाकाल: 2011

Lyrics:

saawan kii badalii barasne lagii hai
maaTii ye sauNdhii mahkane lagii hai
meraa man tere baare mein sochtaa hai
dhaD.kan seene mein garazne lagii hai

har’ek galii mein paanii bharaa huaa hai
kaaghaz kii naav ka chalnaa huaa hai
khiD.akiyoN par booNdein bikhrii huiiN haiN
baagh kii kalii-kalii haNsne lagii hai

maine tere naam kh.at roz likhe likhe the
saMbhaalkar tujhe dene ko rakhe the
main aaj unhein kholkar paDhataa huuN
in aaMkhoN se tuu chhalakne lagii hai

phir kaise bhii tujhse merii raah juD.e
tuu mujhse milkar chaahe roz laD.e
par zindagii kii har subah tujhse hai
ye fizaa ye hawaa bahakne lagii hai

– Vinay Prajapati ‘Nazar’
Penned: 2011

Vocal by Vinay Prajapati ‘Nazar’

एक मेरा सपना तू ही तो थी

एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम
हर लम्हा तेरा नाम जपता हूँ सनम
हाल मेरा बद से बद्तर हो गया है
ज़िंदगी का हर पल बेज़ार हो गया है

एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
अब तेरी राहों में रहता हूँ यार मेरे
कर दिये नाम तेरे मैंने दिन-रात मेरे
तेरी साँसों की ख़ुशबू, बसी है मन मे‍
खिलते हैं जो गुल यार तू है उनमें

एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना
दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना
सीख रहा हूँ मैं, तन्हा कैसे रहते हैं
तन्हा रहकर, कैसे हर पल जीते हैं


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९