ॐ शक्ति है

ॐ शक्ति है ॐ ही ईश्वर प्रतीक है
ॐ नश्वर है ॐ ही सर्वत्र एक है
ॐ भक्ति है ॐ ही शान्ति मंत्र है
ॐ जगत है ॐ ही जीवन तंत्र है

ॐ में तुम हो ॐ हर कण तुम में
ॐ मृदा धातु जल वायु गगन में

ॐ सत्य है ॐ ही चिंतन मनन है
ॐ आत्मा है ॐ ही प्रभु शरण है
ॐ विष्णु है ॐ ही त्रिकाल महादेव है
ॐ दृष्टि है ॐ ही सुर और रव है

ॐ विद्यमान है प्राण है हर जीव में
ॐ ही सजीव में ॐ ही निर्जीव में

ॐ संगीत है ॐ ही श्रेष्ठ मित्र है
ॐ असत्य पर विजय का शस्त्र है
ॐ ब्रह्माण्ड है ॐ उत्पत्ति सूत्र है
ॐ मोक्ष है ॐ ही मुक्ति स्रोत है

ॐ चहुँ ओर ज्ञान का प्रकाश है
ॐ कष्टकाल अंधकार का विनाश है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८

कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से

तह पर तह लगी है
कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से

आँधियों में…
मैं खड़ा रहा साथ उसके
न उसने मुझको देखा
न मैंने उसको देखा
जब गुज़रा यह सिलसिला
तो पाया –
तह पर तह लगी है,
कौन उतारेगा धूल चेहरों पर से…

जो मुझसे…
आज भी अजनबी है
उसके दिल का संग1
मोम तो हो चुका है
मगर उसको अभी
किसी ने पिघलाया नहीं
जब भी पिघलेगा
चेहरा झुलस जायेगा
कौन हटायेगा मोम रुख़सारों पर से…

आँखें मूँद ली हैं उसने
मगर छिपती कब है रोशनी
उसने मुझको छूकर देखा है
मैंने उसको लिखकर
जब दोनों की निगाहों में
ख़राश की
तह पर तह लगी है
कौन उठायेगा शिकन निगाहों पर से…

मुझको डर है कि
वक़्त उसको मुतमइन2 न कर दे
वो बहुत कमज़ोर है
और न समझ भी
कि खु़दकुशी कर लेगा
तह पर तह लगी है
कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से…

शब्दार्थ:
1. पत्थर, stone 2. संतुष्ट, calm

शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३