जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी

जो गुज़र गयी सो गुज़र गयी पुरानी बात थी
उन आँखों में छिपी एक उजली रात थी

जब देखा था मंज़रे-हसीन-हुस्न1 मैंने
उस लम्हा चाँद था और सितारों की बरात थी

साहिब हमें दाँव-पेंच नहीं आते इश्क़ में
और वह प्यार की पहली दूसरी हर मात थी

वह शब2 नहीं भूले जब घर आये थे तुम
उफ़! वह निगाह की निगाहों से मुलाक़ात थी

हम ने दर्द पहने, ओढ़े और बिछाये हैं
एक नयी जलन की यह एक नयी शुरूआत थी

हमने जिसे दिल में जगह दी उसने दग़ा3 किया
हर एक मतलबी की अपनी एक ज़ात थी

रात बादल नहीं थे और चाँद भी रोशन था
साथ हो रही उस की यादों की बरसात थी

जिसने मुझे छूकर तख़लीक़4 किया है ‘नज़र’
गोया5 वह भी इक नज़रे-इल्तिफ़ात6 थी

शब्दार्थ:
1. हसीन हुस्न वाले मंज़र; 2. रात; 3. धोख़ा; 4. आस्तित्व में लाना; 5. जैसे; 6. दोस्ती की नज़र


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

Four days were dark without my moon

Four days were dark without my moon
four nights were bare without your dream

A moment would be like the hundred years
this ain’t a big sore now as it appears

Butterflies of your smile I didn’t find
o my love, please you come back soon

The shadows of sorrow are chasing my feet
but I am ready to defeat the defeat

You’re the face of love, you’re my life
take my hands and give me little room



words: vinay prajapati
penned: 2003
revised: 2008

इश्क़ क्या हमको मारेगा

इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे
अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे

जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं
वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का

एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का
जब तलक साया था सर पे हुमा का

मेरी शिकस्त ही तक़दीर हुई मेरी
जब जाना हुआ मेरे दर से हुमा का


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

I hate everything

I hate everything means everything
I love only my passion
I paint my dreams on canvas
I do exactly as the brat

Like the music, like the rhythm
Live the life whatever result comes
Be sure if you’re guilty
Believe always in tit for tat

People who are selfish n’ eccentric
Would never let you live
I am master of all devils
I do devilry n’ I like all that

I’ll live all seven lives in hell
If you’re not there
I am happy to be all alone
The taste of revenge is great

To the shortest path I’ll go long
You’re use to say it is wrong
I will do what I like most
You better know it’s not my defeat


Words: Vinay Prajapati
Penned: 2006-2007