ॐ शक्ति है

ॐ शक्ति है ॐ ही ईश्वर प्रतीक है
ॐ नश्वर है ॐ ही सर्वत्र एक है
ॐ भक्ति है ॐ ही शान्ति मंत्र है
ॐ जगत है ॐ ही जीवन तंत्र है

ॐ में तुम हो ॐ हर कण तुम में
ॐ मृदा धातु जल वायु गगन में

ॐ सत्य है ॐ ही चिंतन मनन है
ॐ आत्मा है ॐ ही प्रभु शरण है
ॐ विष्णु है ॐ ही त्रिकाल महादेव है
ॐ दृष्टि है ॐ ही सुर और रव है

ॐ विद्यमान है प्राण है हर जीव में
ॐ ही सजीव में ॐ ही निर्जीव में

ॐ संगीत है ॐ ही श्रेष्ठ मित्र है
ॐ असत्य पर विजय का शस्त्र है
ॐ ब्रह्माण्ड है ॐ उत्पत्ति सूत्र है
ॐ मोक्ष है ॐ ही मुक्ति स्रोत है

ॐ चहुँ ओर ज्ञान का प्रकाश है
ॐ कष्टकाल अंधकार का विनाश है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८

You deceived me

I am a jerk, I am a creep
But what are you?
You deceived me by knowing
You are mean, you know

Silly I was, silly I am
I am in love with you
It’s my destruction, my fall
Waiting for you my angel

Hurt me, break me like the glass
Compel them to do so
I’m helpless, I need mercy
Friends behave like foe

Silly I was, silly I am
I made castle in the air
I dreamed all unfortunately
Now you’re so happy

Someday time will turn towards me
To take me higher than high
I will look at you that day
then you’ve to cry…, cry


Words by: Vinay Prajapati
Penned: 2006

नज़र

‘नज़र’ वो नज़र
जो लग जाये तो तबाह कर  दे
अपनी पे आये तो
हर इक अदू को बरबाद कर दे
उसका तैशो-जुनूँ
पागलपन की हद है
वह अपनी से गुज़र जाये तो
हर गुनाह कर दे
उसके नाम के साथ
जो भी जफ़ा करेगा हरजाई
उसको वह बीच भँवर
अपनी के लिए बेसफ़ीना कर दे


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३