I’m deserted with dreams

I’m deserted with dreams to feel the thirst
And trying to find all your best

I did each n’ every time what you wanted
But baby you were blind to count it

You did all the things well, except one
You couldn’t understand my comprehension

I love you truly more than my life
In this world you’re the one of my type

Here is my longing baby, where are you?
Everyday I’m crying blood to get you

Some uncertain things are to be happen
Baby, If we’re going set ourselves frozen

Please please don’t go away don’t be apart
You are from where myself gets start

I want you to get on to happiness
Without you here I am left breathless

frozen: unfriendly


Words by: Vinay Prajapati
Penned: 2004

मैं सबसे बुरा था

मैं सबसे बुरा था
सबसे बुरा हूँ
सबसे बुरा ही रहूँगा
मैं जी रहा था
जी रहा हूँ
ऐसे ही जीता रहूँगा

उसने मुझको सदा ख़ुशबू के
इक बादल के पार देखा
और मैं चाह कर भी कभी
उसको इस तरह न देखूँगा

मैं सबसे बुरा था
सबसे बुरा हूँ
सबसे बुरा ही रहूँगा

आईने उसकी आँखों के
मुझको ढूँढ़ते रहे, जाने क्यों?
और मैं अक्स उन आईनों का
कभी भी न बनूँगा…

मैं जी रहा था
जी रहा हूँ
ऐसे ही जीता रहूँगा

इक मतलब ही तो है
मुझसे जुड़ता हर नया रिश्ता
और मैं ऐसे रिश्तों से कभी
कोई जज़्बात न रखूँगा…

मैं सबसे बुरा था
सबसे बुरा हूँ
सबसे बुरा ही रहूँगा

हर शै पर हुक़ूमत करना
मेरी सबसे बुरी आदत है
और मैं अपनी यह आदत
जानकर भी न बदलूँगा…

मैं जी रहा था
जी रहा हूँ
ऐसे ही जीता रहूँगा

अच्छा या बुरा जो भी समझो
यह तुम्हारी अपनी सोच है
और मैं किसी के लिए
ख़ुद को कभी न बदलूँगा…

मैं सबसे बुरा था
सबसे बुरा हूँ
सबसे बुरा ही रहूँगा

वह किसी ग़ैर के पास जाता है
तो चला जाये, बेपरवाह!
और मैं उसके बेवफ़ा रुख़ का
कभी अफ़सोस न करूँगा…

मैं जी रहा था
जी रहा हूँ
ऐसे ही जीता रहूँगा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा

मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर

इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे करने लगी हैं
आँखों में, रोज़ ख़ाबों में, तेरी तस्वीरें बनने लगी हैं
आ मेरे सनम कर दे धुँधली-धुँधली यादें जवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

यह प्यार मुझको दुनिया से गुमराह करने लगा है
तेरा दीवाना हर चेहरे में तेरा चेहरा पढ़ने लगा है
बता तू, मुझसे मिलेगी, कैसे, कब और कहाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: ०४ मई २००३

इक चाँद है आसमाँ में

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

चाँद जो वह आसमाँ पर है
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं
लेकिन नज़र में तुम नहीं

तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा

तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

यह बीते हुए लम्हों का शोर है

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

उसने इजाज़त नहीं दी है हमें
उन लम्हों को दोबारा पढ़ने की
गुज़रें है वह कभी इधर से
यह बात भुला देने भूलने की

मेरे दरवाज़े तक राह आती है
मगर खुलती है कहीं और यह
समझाते हैं कभी ख़ुद को हम
या भुला देते हैं भूल जाते हैं

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

हम खोलते हैं उन पन्नों को
जिन पर तेरा नाम लिखा था
उड़ जाता है दिल से दर्द वह
जो ख़ुद कभी ख़ुद में सना था

क़ातिल वह मेरे दिल का होगा
कब यह हमसे उसने कहा था
खुल जायेगा वह ज़ख़्म फिर से
जो हमने मुद्दत में सिला था

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९