जब आसमाँ पे यह हिलाल आया

जब आसमाँ पे यह हिलाल आया
मुझे याद तुमसे विसाल आया

जिस शब तारों की बारात आयी
मुझे तुम्हारा ही ख़्याल आया

हमने कितने सवाब हैं कमाये
जो मेरे हिस्से यह जमाल आया

नाज़ करना ख़ुद पे फ़ितरत है
उम्र पे यह कैसा साल आया

है तेरे इश्क़ को रस्मो-राह
उफ़! निगाह में कैसा गुलाल आया

तुझे देखने के बाद ‘नज़र’ का
शुरुआती दौरे-वबाल आया

हिलाल= दूज का चाँद, सवाब= पुण्य, जमाल= सुन्दरता, दौरे-वबाल= कठिन समय


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

ॐ शक्ति है

ॐ शक्ति है ॐ ही ईश्वर प्रतीक है
ॐ नश्वर है ॐ ही सर्वत्र एक है
ॐ भक्ति है ॐ ही शान्ति मंत्र है
ॐ जगत है ॐ ही जीवन तंत्र है

ॐ में तुम हो ॐ हर कण तुम में
ॐ मृदा धातु जल वायु गगन में

ॐ सत्य है ॐ ही चिंतन मनन है
ॐ आत्मा है ॐ ही प्रभु शरण है
ॐ विष्णु है ॐ ही त्रिकाल महादेव है
ॐ दृष्टि है ॐ ही सुर और रव है

ॐ विद्यमान है प्राण है हर जीव में
ॐ ही सजीव में ॐ ही निर्जीव में

ॐ संगीत है ॐ ही श्रेष्ठ मित्र है
ॐ असत्य पर विजय का शस्त्र है
ॐ ब्रह्माण्ड है ॐ उत्पत्ति सूत्र है
ॐ मोक्ष है ॐ ही मुक्ति स्रोत है

ॐ चहुँ ओर ज्ञान का प्रकाश है
ॐ कष्टकाल अंधकार का विनाश है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८

राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में

राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में
है अपना ही मज़ा घुटके मरने का ग़ुमनामी में

मुझको गले से लगाया न फ़रहत न ग़मों ने
शायद मिटना लिखा है इस तक़दीरे-नाकामी में

तक़्क़लुफ़ फ़रमाती है रोज़ ज़ीस्त मुझसे
तक़लीफ़ बहुत पेश आ रही है इस ग़ुलामी में

मुद्दतों में ढूँढ़ पाया वह एक ख़ामी तो कहता है
बहुत सारी अच्छाइयाँ हैं ‘वफ़ा’ की एक ख़ामी में


शायिर: विनय प्रजापति ‘वफ़ा’
लेखन वर्ष: २००३