काश यह सन्दली शाम महक जाती

काश यह सन्दली शाम महक जाती
सबा* तेरी ख़ुशबू वाले ख़त लाती

तुझसे इक़रार का बहाना जो मिलता
मेरी क़िस्मत शायद सँवर जाती

दीप आरज़ू का जलता है मेरे लहू से
काश तू इश्क़ बनके मुझे बुलाती

दूरियाँ दिल का ज़ख़्म बनने लगीं हैं
होता यह नज़दीकियों में बदल जाती

सबा: ताज़ा हवा, breeze


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

मैंने तेरा नाम नहीं जाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

पहली नज़र में होश गुम गया
दूसरी नज़र का हाल कैसे बताऊँ
दिल को आना था तुम पर आ गया
भला दिल को मैं कैसे समझाऊँ

पहले चरचे मेरी यारी के होते थे
अब मैं हो गया ख़ुद से बेग़ाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

आशिक़ी, उल्फ़त, प्यार, मोहब्बत
हमने तो बस यह नाम सुने थे
देखकर तुम्हें जाना लोग सच कहते थे
जो प्यार करता है ख़ुद से डरता है
शीरीं-फ़रहाद कब ज़माने से डरते थे

तेरे हुस्न की कटार दिल पर चली है
मिटकर रहेगा शमअ पर परवाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना

दिल का हाल अजब हो गया है
उसका सितम ग़ज़ब हो गया है
यह इश्क़ अक़ीदत हो चला है
तुमसे प्यार मेरा रब हो गया है

दिल में लहू नहीं तेरा प्यार बहता है
यह दिल है तुम्हें चीरकर दिखलाना

मैंने तेरा नाम नहीं जाना
जाना तो जाना बस इतना जाना
प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: ०३ मई २००३

तुम मेरे हो

तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
दिल की सदा साँसों के सिलसिले
कहते हैं तुम मेरे हो तुम मेरे हो
यह तूफ़ान यह ऊँचा-ऊँचा आसमान
कहता है तुम मेरे हो तुम मेरे हो
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो

जलती है नस-नस में तेरी मोहब्बत
आते नहीं आँखों में अश्क क्योंकि
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
दिल को लगी तेरी लगन, तरसते हैं
तेरे लिए मेरे यह दो नयन क्योंकि
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो

जाओ चाहे जहाँ भी तुम अलग नहीं
यह तुम्हारा दीवाना तुम्हें ढूँढ़ लेगा
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो
तेरी लकीरों से मेरी लकीरें जुड़ी हैं
तेरा शैदाई दिल में इश्क़ जगा देगा
तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

तेरी चुप निगाहें

तेरी चुप निगाहें व शर्मायी नज़रें
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं, मेरे लिए
एक बार तो कुछ कह दे सनम
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए

तेरी मुस्कुराहटें तेरी सादी अदाएँ
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए
परियों से भी कहीं ज़्यादा हसीं
खिलती कलियों-सी तू माहजबीं
ख़ुदा ने तुझे बनाया है मेरे लिए

तेरे सारे शिकवे वह सभी यादें
तेरे प्यार का तोहफ़ा हैं मेरे लिए
मुझे तेरा इन्तिज़ार था बरसों से
हम एक-दूजे के बने जनमों से
तुमने जनम लिया है मेरे लिए

आँखों में माहताब-सा चमकता है
तेरा चेहरा, तेरा चेहरा, तेरा चेहरा
मैं सहराँ-सहराँ भटकता हूँ तेरे लिए
तू एक बार तो हाँ कर दे मुझसे
ज़िन्दगी एक झमेला है मेरे लिए


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से
कुछ न कुछ बात तो सभी में थी
पर हसीना तेरी कुछ और ही बात है

ख़ुदाया यह कितना हसीन इत्तिफ़ाक़ है
तेरे जैसी ख़ूब-रू हसीना मेरे साथ है
गोरा-गोरा रंग तेरा क़ातिल हैं निगाहें
जबसे देखा तुझे चाहा थामूँ तेरी बाँहें

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से

रूप तुम्हारा ऐसा हम फ़िदा हो गये
जबसे देखा तुम्हें हम दिलरुबा खो गये
सुर्ख़-गीले होंठ तेरे, जैसे गुलाब खिले
दिल गया मेरा काम से तुम ऐसे मिले

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से

सुन नौ-जवाँ प्यार का इश्क़ नाम है
डूबें तुझमें हमें और क्या काम है
ख़ुदा ने नवाज़ा तुझे बेपनाह हुस्न से
कैसे न हम तेरा हर पल दीदार करें

जीज़स से पूछेंगे तुमको बनाया कैसे
कम्प्यूटर से रचा या बनाया हाथ से


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९