मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा

मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर
मेरे जिस्मो-जाँ को जीवन दे जा ओ बेवफ़ा फिर

इन राहों पर हल्के गुलाबी फूल खिलने लगे हैं
बेज़ुबाँ दिल में मोहब्बत के अरमान जगने लगे हैं
आ निगाहों में आ जा, कर दे धड़कनें रवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

उदासियाँ, तन्हाइयाँ, मुझसे शिकवे करने लगी हैं
आँखों में, रोज़ ख़ाबों में, तेरी तस्वीरें बनने लगी हैं
आ मेरे सनम कर दे धुँधली-धुँधली यादें जवाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर

यह प्यार मुझको दुनिया से गुमराह करने लगा है
तेरा दीवाना हर चेहरे में तेरा चेहरा पढ़ने लगा है
बता तू, मुझसे मिलेगी, कैसे, कब और कहाँ फिर
मेरे दिल की पगडंडियों से गुज़र जा एक दफ़ा फिर


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: ०४ मई २००३

इक चाँद है आसमाँ में

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

चाँद जो वह आसमाँ पर है
ख़ाब जो वह ज़मीं पर है
उसकी रोशनी फैली है हर कहीं
लेकिन नज़र में तुम नहीं

तेरी झलक पर यूँ कोहरे क्यों छा गये
तुम नहीं जब तो यह गुल मुरझा गये

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन

नग़मा जो वह ज़ुबाँ पर है
कलमा जो वह दिलो-जाँ पर है
बेवफ़ा, सुनो मेरे दिल की सदा
तेरे लिए ही है मेरी वफ़ा

तुमसे ही मेरा जहाँ, तुम मेरी हमनवाँ
एतबार मेरा कर ले मुझे बाँहों में भर ले

इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन
दिल में है हर पल इक तड़पन
सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

यह बीते हुए लम्हों का शोर है

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

उसने इजाज़त नहीं दी है हमें
उन लम्हों को दोबारा पढ़ने की
गुज़रें है वह कभी इधर से
यह बात भुला देने भूलने की

मेरे दरवाज़े तक राह आती है
मगर खुलती है कहीं और यह
समझाते हैं कभी ख़ुद को हम
या भुला देते हैं भूल जाते हैं

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं

हम खोलते हैं उन पन्नों को
जिन पर तेरा नाम लिखा था
उड़ जाता है दिल से दर्द वह
जो ख़ुद कभी ख़ुद में सना था

क़ातिल वह मेरे दिल का होगा
कब यह हमसे उसने कहा था
खुल जायेगा वह ज़ख़्म फिर से
जो हमने मुद्दत में सिला था

यह बीते हुए लम्हों का शोर है
या तन्हाई के ग़म की ख़ामोशी
दिल को कुछ शोर जान पड़ता है
मगर वह कानों में क्यों नहीं


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९

Can’t stop loving you

My Love (SK),

 

Love is an eternal feeling. For you my affection is an eternity. You are an offish because I am an idiot savant. With millions of stars as azure is incomplete without moon, me too incomplete without you. With all the colours as the flower is incomplete without fragrance, me too incomplete without you. You are my beloved. I don’t want to loose you at any cost but everything is not in my hands because I don’t know, you love me or not. Like an idiot and a stupid I am sending you letters and letters. You may think I am evildoer but I can’t stop loving you due to following belief:

“फ़ासला दो नज़रों का धोख़ा भी तो हो सकता है
वह मिले या न मिले हाथ बढ़ाकर देखो…”*

“distance between two hearts may be just an illusion
go ahead and propose, rest leave on the luck…”^

Yours Truly


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
*यह शे’र बशीर बद्र (Bashir Badr) का है

बेवफ़ा कहकर तुझको कोई इल्ज़ाम न दूँगा

बेवफ़ा कहकर तुझको कोई इल्ज़ाम न दूँगा
अपनी पाकीज़ा मोहब्बत को दुश्नाम न दूँगा

उन सिलसिलों की ख़ुशबू आज भी आँखों में रची है
इस रंगे-हिना को अश्कों का अन्जाम न दूँगा

तेरे हुस्न की बर्क़ ने मारा है दीवाना करके
तेरा ग़ुलाम हूँ किसी के हुज़ूर में सलाम न दूँगा

तू हर्फ़े-मुक़र्रर है मेरी तक़दीर में जानाँ
मैं किसी भी ग़ैर को अपने दिल में मुक़ाम न दूँगा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३