To see you

To see you, I am not me, you see
It’s just the first crush or last may be

To see you I do nothing to everything
Your are love that happiness brings

You are my dream to be come true
In my arms I want to hold you

Tonight moon is resembling your face
So bright n’ beautiful with grace

Going night is killing me silently
Want to say I love you passionately

Don’t ask what I am without you
I feel n’ find myself minimal and blue

To get a photo isn’t enough for me
Angel I’m looking for your heart’s key


Words by: Vinay Prajapati
Penned: 2004

हम सब के सच्चे दोस्त हैं

हम सब के सच्चे दोस्त हैं
हर दिल की बात समझते हैं
उसकी ख़ुशी को हम अपने
ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
जिस दिन भी पुकारा उसने मुझे
मेरे मद्यए-मुक़ाबिल के सर मौत का सेहरा होगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
मैं दूर से ही देखकर उसे ज़िन्दा हूँ
हूँ इन्तिज़ार में वह किस दिन मुझे पुकारेगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
उसके हाथों की लकीरें मैंने देखी नहीं
लेकिन ज़रूर इनमें मेरे चाँद का चेहरा होगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
मेरी आँखों ने देखे हैं जितने भी ख़ाब हसीं
वह सदा उनसे रहा है वाबस्ता, सदा रहेगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
उसका दर्द मुझको जुनूनी कर देता है
जाने कब वह मेरी बाँहों में आके मुस्कुरायेगा

वह सिर्फ़ मेरा है मेरा ही रहेगा
आँखों ने टूटे हुए ख़ाब के टुकड़े भुला दिये
वह इक सच्चे ख़ाब को किस दिन पूरा करेगा


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

चुपके से दिल को दिया

चुपके से दिल को दिया
चुपके से दिल को लिया
छल्ला बनाकर उँगली में पहन लिया

रात-दिन चूमती हूँ इसे
रात-दिन चाहता हूँ तुम्हें
पास जो तुम आ गये सब मिल गया

सब्ज़ मौसम हसीं आँखों में खिल गये
प्यार में तुम हमें ऐसे जो मिल गये
ख़ाब सारे अपने सच हो गये चुपके से

नाज़ तुम्हारा एक अदा है
दिल तुम पर फ़िदा है
जादू यह तुम्हारे, सब हैं हुस्न के शरारे

तुम्हारी आँखों के तीर
मेरे दिल को जाते चीर
हम मिट गये तुम्हें छू लिया चुपके से

बहकी हुई हैं धड़कनें, बदली हैं ख़ाहिशें
आरज़ू तुम्हारी थी, जुस्त-जू पूरी हो गयी
हमें सब कुछ हासिल हो गया चुपके से


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी
मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ
निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम करता हूँ

सो जाते हैं सारे मात्र मैं ही जागता हूँ
उठके रात्रि में तेरा नाम पुकारता हूँ
टूटे कोई तारा अगर तुम्हें माँगता हूँ

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी
मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ

सपनों में तुम न आयी कैसी रुसवाई
कैसे मैं बताऊँ तुम्हें क्यों तड़पता हूँ
बिन ऋतु कभी-कभी क्यों बरसता हूँ

मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी
निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम करता हूँ


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: १९९८-१९९९