You’re an angel

You’re an angel
Come to earth
Only for me
Most beautiful
In whole world
As one should be

You are my dream
That I wanted
In my life
I never found
Someone like you
You’re my type

Don’t take me wrong
If I got hurt you
Don’t be angry

You are an angel
Come to earth
Only for me
Most beautiful
In whole world
As one should be

Through my eyes
You look gorgeous
You look best
You are the one
Compare to whom
Beauty is dust

I was all alone
You turned me on
Thanking you gladly

You’re an angel
Come to earth
Only for me
Most beautiful
In whole world
As one should be


Words by: Vinay Prajapati
Penned: 2004

वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है

वह मुझसे बहुत नफ़रत करता है
जाने सही करता है या ग़लत करता है

वह मुझे नहीं चाहता, जानता हूँ मैं
दिल फिर भी उसकी हसरत करता है

उसने दिल तोड़ दिया है मेरा मगर
दिल है कि उसको मग़्फ़रत* करता है

वह चाहता है न देखूँ उसकी जानिब मैं
दिल बार-बार वही ज़ुर्रत करता है

शब्दार्थ: मग्फ़िरत या मग़्फ़रत: मोक्ष, यहाँ हर प्रकार के पाप से मुक्ति के सम्बंध में!


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत

मेरी मोहब्बत को समझते हो तुम ग़लत, ग़लत नहीं है
तुमको चाहा है मैंने अगर इसमें कुछ ग़लत नहीं है

दिखा दो तुम कोई अपना-सा इस ज़माने में मुझको
मैं अगर फिर चाह लूँ उसको इसमें कुछ ग़लत नहीं है

आँखों को मेरी सुकून आया है तेरी हसीन सूरत देखकर
किसी चेहरे से सुकूनो-सबात पाना कुछ ग़लत नहीं है

मैं ने अगर देखा है तेरी आँखों में तो तूने भी देखा है
मोहब्बत की नज़र से किसी को देखना कुछ ग़लत नहीं है

डरते हो क्या तुम अपने-आप से या फिर जानकर किया सब
पहले प्यार में दिल का उलझ जाना कुछ ग़लत नहीं है


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००४

और दाँव अपनी जाँ का

और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा
फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा

यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई किसी बात पे
तुमने ज़रूर नमक में छालों को गलाया होगा

इक मेरे’ कौन दूसरा दुनिया में तन्हा है
तुमसे ऐसा रिश्ता भला किसने निभाया होगा

न कोई आहट है ‘नज़र’ न कोई ख़बर है
क़ासिद ने ग़लत दरवाज़ा खटखटाया होगा

क़ासिद= messenger


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३

I hate everything

I hate everything means everything
I love only my passion
I paint my dreams on canvas
I do exactly as the brat

Like the music, like the rhythm
Live the life whatever result comes
Be sure if you’re guilty
Believe always in tit for tat

People who are selfish n’ eccentric
Would never let you live
I am master of all devils
I do devilry n’ I like all that

I’ll live all seven lives in hell
If you’re not there
I am happy to be all alone
The taste of revenge is great

To the shortest path I’ll go long
You’re use to say it is wrong
I will do what I like most
You better know it’s not my defeat


Words: Vinay Prajapati
Penned: 2006-2007