मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा

‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा
ऐसा भी क्या गुनाह उसका, जो…

मोहब्बत में न’कामयाब बैठा रहे

मग़फ़रत= मुक्ति, मोक्ष, moksa


शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’
लेखन वर्ष: २००३